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बरसाने में हर तरफ हो रही अखिलेश की तारीफ, जाने वजह

बरसाने में हर तरफ हो रही अखिलेश की तारीफ, जाने वजह

द ब्रज फाऊंडेशन के अध्यक्ष विनीत नारायण ने अपने विचार साझा किए

श्री अखिलेश यादव के साथ पहली बार बिताये दो दिन के कुछ अनूठे अनुभव;

  1. अखिलेश जी शायद उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्तर के व्यक्ति हैं जो राधा रानी ( बरसाना) के दर्शन करने सरकारी कारों के क़ाफ़िले में कर्कश सायरन बजाते हुए, ब्रह्मगिरि पर्वत पर चढ़कर नहीं , बल्कि 250 से ज़्यादा खड़ी व ऊँची सीढ़ियाँ चढ़कर गये। जिसकी प्रशंसा कल से सभी बरसानवासी कर रहे हैं।
  2. उनके साथ एकदम तेज़ी से इतनी सारी सीढ़ी चढ़ने से (65 वर्ष की उम्र में ) मैं जैसे ही थोड़ा हाँफा अखिलेश ने फ़ौरन मुझे पकड़कर मुँडेर पर बैठा दिया । पानी पिलाया और उसके बाद वे मेरी चिंता में लगातार धीरे- धीरे, रुक -रुक कर सीढ़ी चढ़े । अपने सुरक्षा कर्मियों से बराबर मेरा ध्यान रखने को और मुझे सहारा देने को कहते रहे ।बहुत हृदयस्पर्शी था उनका बुजुर्गों के प्रति ये आत्मीय व्यवहार ।
  3. दो दिवसीय दौरे में मैं लगातार उनकी कार में ही साथ बैठा था और हम लोग ज़्यादातर चर्चा ब्रज के समुचित और कलात्मक तरीक़े से विकास की सम्भावनाओं पर कर रहे थे। पर इस पूरे दौरान उनकी कार में पंडित जसराज या अन्य उच्च कोटि के शास्त्रीय गायकों के गाये भजन या श्लोक बजते रहे, जिनका उनके पास अच्छा संग्रह था। कितने नेता शास्त्रीय शैली में गाये भजनों की समझ रखते हैं और उनमें रस लेते हैं ?
  4. पीली पोखर ( बरसाना) में ब्रज के विरक्त संत श्री विनोद बाबा के श्रीचरणों में जिस तरह अखिलेश जी ने कई बार ढोक लगाई। बाबा के अत्यंत सरल व सादगीपूर्ण आश्रम में ज़मीन पर बैठकर विनम्रता और श्रद्धा के साथ पत्तल में प्रसाद पाया , उससे अंतर्यामी बाबाश्री भी गद्गगद हो गये। हमारे जाने के बाद में अपने शिष्यों के पूछने पर बाबा का कहना था, “ ये अहंकार शून्य व्यक्ति हैं” । बाद ने उन शिष्यों ने मुझे फ़ोन पर बताया कि जैसी नकारात्मक छवि अखिलेश जी की बनायी गयी थी , उसके विपरीत वे अत्यंत सरल, आस्थावान और विचारवान हैं ये अनुभव सभी आश्रमवासियों को हुआ।
  5. जब गोवर्धन में मैंने अखिलेश जी को द ब्रज फ़ाउंडेशन द्वारा बनाये गये ऋणमोचन कुंड का महत्व विहार के गया तीर्थ के सामान बताया तो वे फ़ौरन जूते उतारकर सीढ़ियों से नीचे गए और अपने दादा, दादी और अपनी दिवंगत माँ की स्मृति में तीन बार जल से तर्पण किया। इसी तरह रामताल और जैंत में भी उन्होंने द ब्रज फ़ाउंडेशन के कार्यों को सराहा।
  6. भगवान श्रीकृष्ण पर उन्होंने ग्रंथों का गहरा अध्ययन किया है ये उनकी बातचीत से लगातार झलकता रहा ।

कल उनके व्यक्तित्व के इन पहलुओं को जानकर समझ में आया कि क्यों वे इतने पॉज़िटिव सोच वाले और जिज्ञासु प्रवृति के हैं । वरना मात्र 38 वर्ष की आयु में देश के सबसे बड़े प्रांत के , सबसे कम उम्र के , मुख्यमंत्री बनने के बाद तो उनका अहंकार आसमान छू सकता था।

पर जब उनके मुख्यमंत्री बनते ही मैं ब्रज विकास पर चर्चा करने लखनऊ गया तो ब्रज फ़ाउंडेशन का काम देखकर उन्होंने फ़ौरन मुख्य सचिव जावेद उसमानी जी को वहीं बुलाकर उनको निर्देश दिया कि सभी सम्बंधित विभाग के सचिवों के साथ मेरी टीम की मीटिंग करवाएँ और ब्रज विकास के हमारे प्रस्तावों पर मंथन करें। फिर अगले ही दिन वे खुद भी मीटिंग में बैठे और हमारे कई प्रस्तावों पर कार्य शुरू करवा दिया।

कोई व्यक्ति अपने पद, पैसे और प्रसिद्धि से बड़ा आदमी नहीं होता , उसके संस्कार बताते हैं की वो कितना बड़ा या छोटा आदमी है ।

राधे राधे !

विनीत नारायण

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